जांघो पर हाथ फेरकर समझाया


Kamukta, antarvasna मेरा मन विदेश में पढ़ाई करने का बहुत था और मैं अपने जीवन में कुछ अच्छा ही करना चाहता था जिस वजह से मैंने विदेश में पढ़ने की सोची, मेरे माता-पिता मुझे कहने लगे बेटा हम तुम्हारी फीस नहीं दे पाएंगे लेकिन मैंने उन्हें कहा कि मुझे वहीं पढ़ना है और मुझे वही सेटल होना है तो शायद उन्होंने भी मेरी बात मान ली और मुझे विदेश पढ़ने के लिए भेज दिया। मैं विदेश में पढ़ाई कर रहा था और मैं अपनी पढ़ाई में बहुत ध्यान दिया करता मैं वहां पर पार्ट टाइम जॉब करता जिससे कि मेरा जेब खर्चा निकल जाता और मुझे अपने मम्मी पापा से पैसे मांगने की जरूरत नहीं पड़ती थी। जब मेरी पढ़ाई पूरी हो गई तो उसके बाद मैं कुछ समय के लिए घर आया जब मैं घर आ रहा था तो उस वक्त मेरे साथ फ्लाइट में लड़कियां भी थी उनमे से मुझे एक लड़की बहुत अच्छी लगी लेकिन उसके बाद मैं उसे मिला ही नहीं परंतु एक दिन बड़ा ही अजीब इत्तेफाक हुआ वह लड़की मेरी बहन के साथ थी मुझे तो यकीन ही नहीं हुआ कि वह मेरी बहन को जानती है।

जब मेरी बहन ने मुझे उससे मिलवाया तो वह कहने लगी यह प्राची है और यह हमारे मामा की तरफ से रिश्तेदार लगती है, मैंने अपनी बहन से पूछा लेकिन मैंने तो कभी प्राची को देखा ही नहीं तो वह कहने लगी यह ऑस्ट्रेलिया में रहती है और वहीं पर पढ़ाई करती है जब मेरी बहन ने यह बात मुझे बताई तो मैंने प्राची से कहा मैं भी तो वहीं पर पढ़ाई करता था। हम दोनों की बात होने लगी जब उसने मुझे अपने कॉलेज का नाम बताया तो मुझे मालूम पड़ा उसका कॉलेज भी हमारे कॉलेज से कुछ दूरी पर ही था मैंने उससे कहा यह भी बड़ा ही अजीब इत्तेफाक है हम दोनों दूसरे देश में रहते हुए भी एक दूसरे को नहीं पहचान पाए लेकिन अब हम दोनों एक दूसरे को पहचानने लगे इस बात से प्राची भी कहने लगी हां आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। प्राची बहुत ही अच्छी लड़की है उसके साथ बात करके मुझे बहुत अच्छा लगा मैं शायद उसे दिल ही दिल चाहने लगा था लेकिन मेरे सामने यह समस्या थी कि वह मेरे रिश्तेदार थी और शायद इस बात को कोई भी स्वीकार नहीं कर सकता था इसलिए मैंने यह बात किसी को नहीं बताई और प्राची से दिल ही दिल मैं प्यार कर बैठा।

प्राची को मैंने अपनी फेसबुक प्रोफाइल में भी ऐड कर लिया था मैं ज्यादा समय तो घर पर नहीं रुकने वाला था क्योंकि मुझे अब जॉब भी वहीं करनी थी और मैं ऑस्ट्रेलिया में ही जॉब करना चाहता था इसलिए मैंने जॉब के लिए अपना रिज्यूम दे दिया, उसके बाद मुझे वहां से मेरा इंटरव्यू का मैसेज आ गया था लेकिन उसे होने में करीब दो महीने थे मैंने सोचा इतने लंबे समय तक मैं वहां पर क्या करूंगा तो मैं घर पर ही था उसी दौरान प्राची हमारे घर पर आई और वह मुझे कहने लगी आज शिखा नहीं दिखा दे रही। शिखा मेरी बहन का नाम है मैंने प्राची से कहा तुम बैठो मैं शिखा को भी फोन कर देता हूं वह पड़ोस में ही गई होगी, मैंने शिखा को फोन किया और कुछ देर बाद वह घर पर आ गई जब वह घर पर आई तो मैं और प्राची बात कर रहे थे और मेरी बहन भी हम दोनों के साथ आकर बैठ गई और कहने लगी चलो यह तो अच्छा है कि तुम घर पर हो तो तुमने प्राची को भी कंपनी दे दी, मैंने अपनी बहन से कहा हां यदि मैं घर पर नहीं होता तो फिर शिखा को कौन कंपनी देता। मेरी बहन और प्राची आपस में बात कर रहे थे मैंने उन्हें कहा मैं अभी आता हूं, मैं वहां से अपने एक दोस्त के घर पर चला गया मैं जब वापस लौटा तो तब भी वह दोनों साथ में बैठी हुई थी और बात कर रही थी मैंने उन्हें कहा तुम दोनों कितने देर से बैठी हुई हो और बात कर रही हो क्या तुम दोनों की बात ही खत्म नहीं हो रही, तभी प्राची मुझे कहने लगी तुम्हें क्या पता कि हम लोगों के पास कितनी बातें होती हैं मैंने उन्हें कहा चलो मैं भी तुम्हारे साथ बैठ जाता हूं। मैं उन लोगों के साथ बैठ गया और बात करने लगा मेरी बहन शिखा और मेरे बीच बहुत ही अच्छी बॉन्डिंग हैं हम दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छे से समझते हैं इसलिए मैं उसके साथ हमेशा मजाक ही करता रहता हूं तभी प्राची ने मुझे कहा मुकेश मुझे शिखा बता रही थी कि तुम ने ऑस्ट्रेलिया में ही जॉब के लिए अप्लाई किया है।

मैंने प्राची से कहा मैंने वही पर जॉब के लिए ट्राई किया है मैं वहीं पर जाना चाहता हूं और वहीं सेटल होना चाहता हूं प्राची मुझे कहने लगी मैं भी वहीं सेटल होने की सोच रही हूं लेकिन अभी मैं कुछ समय घर पर रहना चाहती हूं मैंने उसे कहा फिलहाल तो मैं भी दो महीने तक यहीं पर हूं और दो महीने के बाद ही मैं हॉस्टल आ जाऊंगा प्राची मुझे कहने लगी कि हम लोगों को मिले हुए इतने दिन हो चुके हैं लेकिन हम लोग साथ में कहीं भी नहीं गए हैं क्या हम लोग साथ में कहीं घूमने का प्लान बनाएं? मैंने शिखा से पूछा तो शिखा कहने लगी हां वैसे भी मैंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर कुछ पैसे जमा किए थे वह पैसे मेरे काम आ जाएंगे और हम लोग कहीं घूम भी लेंगे। हम लोगों ने साथ में घूमने का प्लान बना लिया लेकिन हमें समझ नहीं आ रहा था कि हम लोग कहां जाएं लेकिन दिल्ली से जयपुर की दूरी ज्यादा नहीं है इसलिए हम तीनों ने जयपुर जाने का फैसला किया और मैंने अपनी मम्मी को बता दिया था मम्मी ने पापा को भी यह बात बता दी मम्मी मुझे कहने लगी बेटा तुम शिखा और प्राची का ध्यान रखना मैंने उन्हें कहा हां मम्मी आप चिंता मत कीजिए मैं दोनों का ख्याल रखूंगा और उसके बाद हम लोग पापा की कार से जयपुर चले गए तो वहां पर मैंने अपने पुराने दोस्त को फोन कर दिया वह मेरे साथ स्कूल में पढ़ा करता था और उसके पिताजी का वहां काफी बड़ा कारोबार है।

मैंने शेखर को सब कुछ बता दिया था और उसे कहा था कि मेरे साथ मेरी बहन और मेरी दोस्त भी है तो वह कहने लगा कोई बात नहीं तुम लोग यहां पर आ जाओ मैं सारी व्यवस्था करवा देता हूं और जब हम लोग शेखर से मिले तो उसने हमारे लिए एक होटल में बुकिंग की हुई थी उस होटल के ओनर उसके जान पहचान के थे इसलिए उन्होंने हमारे लिए होटल में थोड़ा बहुत डिस्काउंट कर दिया था। जब हम लोग होटल में रुके तो मैंने शिखा से पूछा यहां पर रूम कैसा है तो वह कहने लगी रूम तो ठीक हैं और प्राची भी कहने लगी यहां पर सही है, मैंने दोनों से कहा तुम दोनों यहीं रुको मैं शेखर के साथ उसके घर जा रहा हूं यदि कोई दिक्कत हो तो मुझे फोन कर देना, शेखर कहने लगा यार यहां पर कोई दिक्कत वाली बात नहीं है यह मुझे अच्छे से जानते हैं इसीलिए तो मैंने यहां पर रूम बुक किया था ताकि तुम लोगों को कोई परेशानी ना हो। उसके बाद मैं वहां से शेखर के घर पर चला गया मैं उसके मम्मी पापा से पहली बार ही मिला था लेकिन उनसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा मैं शेखर के घर पर करीब दो-तीन घंटे रुका और उसके बाद मैंने शेखर से कहा तुम मुझे होटल छोड़ देना शेखर मुझे कहने लगा ठीक है मैं तुम्हें होटल छोड़ देता हूं आज तुम वहीं आसपास घूम लेना उसके बाद मैं तुम्हें कल अच्छे से घुमा दूंगा। शेखर ने मुझे होटल में छोड़ दिया और वह वहां से अपने घर वापस लौट गया, प्राची और शिखा कमरे में सोई हुए थी मैं देखा दरवाजा तो खुला ही है मै रुम मे बैठ गया मै अपने मोबाइल में गेम खेलने लगा तभी मेरी नजर प्राची की गोरी जांघ पर पड़ी उसकी टांगों को मैंने देखा तो उसके पैरो पर एक भी बाल नहीं था, वह बड़े ही आराम से सो रही थी।

मैंने उसकी टांगों को अपने हाथों से सहलाना शुरु किया और धीरे-धीरे उसकी छोटी सी निक्कर को मैंने उतार दिया उसकी पैंटी देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। उसने काले रंग की पैंटी पहनी हुई थी उसमें उसकी चूत बडी ही सेक्सी लग रही थी मैंने उसकी पैंटी को उतार दिया शिखा बहुत ज्यादा गहरी नींद में थी। मैंने प्राची की पैंटी को उतारते हुऐ उसकी चूतड़ों को चटना शुरू किया, जब मैंने उसकी चूतडो को चाटना शुरू किया तो वह बहुत गहरी नींद में थी, उसकी चूत से पानी निकलने लगा। मैं अपनी उंगली को उसकी चूत पर लगाया तो उसकी चूत से गरम पानी बाहर निकल रहा था। मैंने अपने लंड को अपने हाथ से हिलाते हुए खड़ा कर लिया जैसे ही मैंने प्राची की योनि पर अपने लंड को लगाया तो वह तब भी सो रही थी। मैंने अपने लंड को उसकी योनि पर रगडना शुरू किया और धीरे-धीरे उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर जाते ही उसके मुंह से चीख निकल पड़ी लेकिन मैंने उसका मुंह दबा दिया, उसे भी मजा आने लगा था मैं तेजी से उसे धक्के देने लगा था, प्राची उठ चुकी थी लेकिन उसकी चूत में मेरा लंड जा चुका था इसलिए उसे बड़ा मजा आता।

मैं तेजी से उसे चोदता जा रहा था वह भी मुझसे अपनी चूतड़ों को मिलाने लगी मैं उसके ऊपर पूरी तरीके से लेट गया और उसे तेजी से धक्के देने लगा। मैंने उसके स्तनों को भी दबाना शुरू कर दिया वह मेरे नीचे लेटी हुई थी उसकी बड़ी चूतडो को मैं इतनी तेजी से धक्के देता की उसके मुंह से चीख निकल पड़ती। मैं काफी देर तक ऐसा ही करता रहा जब पूरी तरीके से प्राची को भी मजा आ गया तो वह मुझे कहने लगी मैं अब झड चुकी हूं उसने धीरे से मुझे कहा तुम मुझे तेजी से धक्के दिए जाओ। मैं उसे बड़ी तेजी से धक्का देता जैसे ही मेरा वीर्य पतन प्राची की योनि के अंदर हो गया तो हम दोनों ही बाथरूम के अंदर चले गए और उसने अपनी योनि को साफ किया उसकी योनि से खून निकल रहा था। वह मुझे देखकर शर्माने लगी लेकिन उसने मुझे कुछ नहीं कहा उसके बाद मेरा जब भी मन होता तो मैं उसकी जांघों पर हाथ फेर दिया करता और वह मेरे इशारे समझ जाती।


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